pcs exams के अनुभव
eeee फिर हरिद्वार जाना था.........पी.सी.एस.(मेन्स) के exams के लिए........अचानक जून last week में मुझे मेरी दोस्त दीपा का sms आया कि हमारे pcs (mains) exams की डेट शीट आ गई है न्यूज़ पेपर में.........मैं तो एक तरह से सदमे में ही आ गई थी ये सुनकर...............हांलाकि मेरे pcs (प्रेलिम्स) के results तो मई २००८ में ही आ चुके थे.यानी कि मेरे पास exams कि तैयारी के लिए काफी टाइम था. लेकिन पता नही इसे सौभाग्य कहेंगे या दुर्भाग्य कि जब तक मैं pcs(mains) की पढ़ाई के लिए सीरियस हो पाती की मेरा बैंक के exams में assistant की पोस्ट के लिए सेलेक्शन हो गया। और फ़िर बैंक में जॉब लगते ही मैंने घर पर ही इन्टरनेट लगवा लिया।तो एक तो दिन भर का ऑफिस का काम और घर आने के बाद नेट पर ही टाइम बरबाद। जैसे भी टाइम waste हुआ पर टाइम बीत गया और तैयारी नही हो पाई.पर अब तो मुझे जाना ही था...........हरिद्वार।
ऑफिस से किसी तरह से छुट्टी लेकर मैं ११ तारीख को सुबह बस से हरिद्वार के लिए चली... thanks to my dear friend deepa. कि उसने पहले से ही एग्ज़ाम सेंटर से थोडी ही दूरी पर room बुक करवा रखा था। वो भी ऐसे समय पर जब कि सारे होटल्स , धर्मशालाएं फुल थे। पहले मेरा सामान्य अध्ययन का एक्साम था, इसलिए बस में सीट मिलते ही मैंने एक सामान्य अध्ययन की किताब खोल ली, और पढने लगी। कुछ ही देर में मेरे पीछे की सीट पर बैठे एक बच्चे ने अपने मोबाइल पर मेरी पसंद के आतिफ के गाने लगा दिए और भी गाने जो लगाये वो मेरे favourites ही थे। कोई और समय होता तो.. मैं कितना खुश होती... ..वो गाने सुनते सुनते सफर बिताने में....लेकिन हाय! अभी ये गाने मुझे पढने नही दे रहे थे.खैर, सफर कट गया और हरिद्वार आ गया।
deepa के बताये रास्ते का ऑटो लिया और पहुँच गई शंकर आश्रम, जहाँ दीपा और हेमा ठहरे थे exams देने के लिए। इनसे मैं आज २ सालों बाद मिल रही थी..नैनीताल में हम best friends हुआ करते थे। तो आते ही बातें शुरू होनी स्वाभाविक ही थीं। हमारी २ सालों की इकट्ठी हुई बातें काफ़ी थीं। वैसे भी कुछ ही दोस्त ऐसे होते हैं जिनसे हम अपनी सारी बातें share कर सकते हैं। तो पढ़ाई कम हुई और बातें ज़्यादा।
अगले दिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक एक्साम होना था अगला पेपर २ बजे से था।मेरा और हेमा का centre एक ही जगह था(भल्ला कॉलेज में), पहला पेपर objective type था। जो हम सभी लोगों का बहुत ही अच्छा रहा, क्योंकि पेपर काफी easy था.इसके बाद हम वापस अपने शंकर आश्रम गए थोड़ा देर आराम करने को लेकिन आराम करते करते देर हो गई और पौने दो बज गए.हम जल्दी से ऑटो लेकर exam-centre पहुंचना चाहते थे लेकिन centre का अंदाज़ नहीं आया और हम आगे पहुँच गए। ऑटो वाले ने हमें वहीँ उतारकर रास्ता बता दिया। हम अपनी ओर से काफी तेज़ चल रहे थे हमारे examination centre (भल्ला कॉलेज) का कोई पता नही चल रहा था। रास्ते में हमें पुलिस वाले दिखे, ये newly appointed लड़के थे. जिनसे हमने कॉलेज का रास्ता पूछा। "आप लोग क्या कोई exam देने के लिए जा रहे हैं वहां?" उन्होंने पूछा। हमने बताया कि..... "हमारा pcs mains का exam है।" अच्छा ? mains का?प्रेलिम्स में, निकल चुके हो? अरे ये लोग तो sdm बनेंगे। अच्छा तो exam ढाई बजे से स्टार्ट होगा न?" " नही २ बजे से" हमने बताया और कहा कि कैसे जल्दी पहुंचें?"अरे २ तो बज गए ! ओय रुक !!" उन्होंने आवाज़ देकर ऑटो वालों को रोका । हांलांकि वो ऑटो फुल थे लेकिन उनकी आवाज़ पर २ ऑटो जो उस समय वहां से गुज़र रहे थे उन्हें रुकने पड़ा.हमें भी मजबूरी में उन खचाखच भरे ऑटो में बैठना पड़ा। ऑटो ने तुंरत हमें भल्ला कॉलेज पहुँचा दिया और पैसे भी नही लिए। पुलिस की सिफारिश का कमाल!.....हम अब अपने room की ओर दौड़ रहे थे पेपर अभी अभी शुरू हो गया था। ये सामान्य अध्ययन का theoretical पेपर था.ये पेपर हमारी अपेक्षा और इच्छा के विपरीत काफी कठिन था.कई ऐसे शब्दों पर पैराग्राफ लिखने थे जो हम पहली बार पढ़ रहे थे या शब्द तो सुने थे पर इतना नही जानते थे उनके बारे में जिन पर पैराग्राफ लिखा जा सके जैसे- वेब 2.0, psiphon, eastern & western himalayas, eddy currents etc। खैर जो कर सकती थी किया और जो नही कर सकती थी छोड़ दिया, मेरा ये पेपर भी इससे पहले वाले पेपर की तरह टाइम से आधे घंटे पहले ही ख़तम हो गया। वापस room पर आकर जब हमने पेपर discuss किया तो हम अपने ऊपर हंस रहे थे। "अरे तुम लोगों को psiphon के बारे में कुछ आता था क्या?" मैंने पूछा। हेमा बोली- "यार मैंने तो लिखा है, psiphon एक बहुत मुलायम किस्म का कपड़ा होता है, यह बहुत महंगा भी होता है, इससे तरह तरह की साडियां और दुपट्टे बनाये जाते हैं।"........" हा,हा,हा,हा, क्या तूने ऐसा लिखा है ? पर ये shiffon कपड़ा नही था यार" मैं बोली।....."हाँ मैंने भी यही लिख दिया है" दीपा बोली।
ऑफिस से किसी तरह से छुट्टी लेकर मैं ११ तारीख को सुबह बस से हरिद्वार के लिए चली... thanks to my dear friend deepa. कि उसने पहले से ही एग्ज़ाम सेंटर से थोडी ही दूरी पर room बुक करवा रखा था। वो भी ऐसे समय पर जब कि सारे होटल्स , धर्मशालाएं फुल थे। पहले मेरा सामान्य अध्ययन का एक्साम था, इसलिए बस में सीट मिलते ही मैंने एक सामान्य अध्ययन की किताब खोल ली, और पढने लगी। कुछ ही देर में मेरे पीछे की सीट पर बैठे एक बच्चे ने अपने मोबाइल पर मेरी पसंद के आतिफ के गाने लगा दिए और भी गाने जो लगाये वो मेरे favourites ही थे। कोई और समय होता तो.. मैं कितना खुश होती... ..वो गाने सुनते सुनते सफर बिताने में....लेकिन हाय! अभी ये गाने मुझे पढने नही दे रहे थे.खैर, सफर कट गया और हरिद्वार आ गया।
deepa के बताये रास्ते का ऑटो लिया और पहुँच गई शंकर आश्रम, जहाँ दीपा और हेमा ठहरे थे exams देने के लिए। इनसे मैं आज २ सालों बाद मिल रही थी..नैनीताल में हम best friends हुआ करते थे। तो आते ही बातें शुरू होनी स्वाभाविक ही थीं। हमारी २ सालों की इकट्ठी हुई बातें काफ़ी थीं। वैसे भी कुछ ही दोस्त ऐसे होते हैं जिनसे हम अपनी सारी बातें share कर सकते हैं। तो पढ़ाई कम हुई और बातें ज़्यादा।
अगले दिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक एक्साम होना था अगला पेपर २ बजे से था।मेरा और हेमा का centre एक ही जगह था(भल्ला कॉलेज में), पहला पेपर objective type था। जो हम सभी लोगों का बहुत ही अच्छा रहा, क्योंकि पेपर काफी easy था.इसके बाद हम वापस अपने शंकर आश्रम गए थोड़ा देर आराम करने को लेकिन आराम करते करते देर हो गई और पौने दो बज गए.हम जल्दी से ऑटो लेकर exam-centre पहुंचना चाहते थे लेकिन centre का अंदाज़ नहीं आया और हम आगे पहुँच गए। ऑटो वाले ने हमें वहीँ उतारकर रास्ता बता दिया। हम अपनी ओर से काफी तेज़ चल रहे थे हमारे examination centre (भल्ला कॉलेज) का कोई पता नही चल रहा था। रास्ते में हमें पुलिस वाले दिखे, ये newly appointed लड़के थे. जिनसे हमने कॉलेज का रास्ता पूछा। "आप लोग क्या कोई exam देने के लिए जा रहे हैं वहां?" उन्होंने पूछा। हमने बताया कि..... "हमारा pcs mains का exam है।" अच्छा ? mains का?प्रेलिम्स में, निकल चुके हो? अरे ये लोग तो sdm बनेंगे। अच्छा तो exam ढाई बजे से स्टार्ट होगा न?" " नही २ बजे से" हमने बताया और कहा कि कैसे जल्दी पहुंचें?"अरे २ तो बज गए ! ओय रुक !!" उन्होंने आवाज़ देकर ऑटो वालों को रोका । हांलांकि वो ऑटो फुल थे लेकिन उनकी आवाज़ पर २ ऑटो जो उस समय वहां से गुज़र रहे थे उन्हें रुकने पड़ा.हमें भी मजबूरी में उन खचाखच भरे ऑटो में बैठना पड़ा। ऑटो ने तुंरत हमें भल्ला कॉलेज पहुँचा दिया और पैसे भी नही लिए। पुलिस की सिफारिश का कमाल!.....हम अब अपने room की ओर दौड़ रहे थे पेपर अभी अभी शुरू हो गया था। ये सामान्य अध्ययन का theoretical पेपर था.ये पेपर हमारी अपेक्षा और इच्छा के विपरीत काफी कठिन था.कई ऐसे शब्दों पर पैराग्राफ लिखने थे जो हम पहली बार पढ़ रहे थे या शब्द तो सुने थे पर इतना नही जानते थे उनके बारे में जिन पर पैराग्राफ लिखा जा सके जैसे- वेब 2.0, psiphon, eastern & western himalayas, eddy currents etc। खैर जो कर सकती थी किया और जो नही कर सकती थी छोड़ दिया, मेरा ये पेपर भी इससे पहले वाले पेपर की तरह टाइम से आधे घंटे पहले ही ख़तम हो गया। वापस room पर आकर जब हमने पेपर discuss किया तो हम अपने ऊपर हंस रहे थे। "अरे तुम लोगों को psiphon के बारे में कुछ आता था क्या?" मैंने पूछा। हेमा बोली- "यार मैंने तो लिखा है, psiphon एक बहुत मुलायम किस्म का कपड़ा होता है, यह बहुत महंगा भी होता है, इससे तरह तरह की साडियां और दुपट्टे बनाये जाते हैं।"........" हा,हा,हा,हा, क्या तूने ऐसा लिखा है ? पर ये shiffon कपड़ा नही था यार" मैं बोली।....."हाँ मैंने भी यही लिख दिया है" दीपा बोली।
"अच्छा तुम लोगों ने sez और 9th schedule के बारे में तो लिख ही लिया होगा पर राघवन committee के बारे में क्या लिखा? मुझे तो यार जब याद नही आया तो मैंने तो financial inclusion से related ही लिख diya है।"बाद में पता चला की रैगिंग से related थी वो कमिटी। मैं फिर अपनी बेवकूफी पर बहुत हँसी। पर अपने मन में मैं अपने को कोस रही थी कि.. जब आता नही था तो तुक्का लगाने की क्या ज़रूरत थी।
रात को पास के एक रेस्तरां में हमने खाना खाया। और हरिद्वार की तपती गर्मी में फर्स्ट floor के गरमी से तपते कमरे में कूलर चला कर सो गए.अगले दिन हमारा सामान्य हिन्दी और essay का पेपर था.हिन्दी में हममे से किसी ने भी पहले से कुछ नहीं पढ़ा था। exams की सुबह ही 'सरकारी और अर्ध-सरकारी पत्र लेखन aur circulars. के बारे में पढ़ा। बस हिन्दी तो अपनी हिन्दी ही है.हिन्दी का पेपर ठीक ही कर लिया, वैसे भी इसके marks merit में काउंट नही होने थे, इसे बस पास ही करना था.फिर निबंध के पेपर में ३ घंटों में ३ निबंध लिखने थे, मैंने पहला लिखा- दहेज़ प्रथा पर, दूसरा लिखा-'वैज्ञानिक विकास और पर्यावरण प्रदूषण' पर, तीसरा लिखा-भारत में बाढ़ की समस्या पर। हर निबंध 700 शब्दों का लिखना था।
शाम को कमरे पर आकर हमने फिर पेपर discuss किया, हेमा, जिसकी साहित्यिक भाषा पर काफी अच्छी पकड़ है, ने अपनी भाषा में अच्छा काम किया था, जैसा कि उसके बताने से लग रहा था।फिर हम खाना खाने गए पर खाने में बहुत मिर्च थी.हेमा ने कहा "अब इस खाने ने मेरे मुह का taste ख़राब कर दिया, चलो टिक्की खाते हैं।उसने और दीपा ने टिक्की खायी और मैंने गोलगप्पे ...ये सोचते हुए कि गोलगप्पों का पानी खाना पचाने में मदद करेगा।
अगले दिन बस में बैठकर मैं हल्द्वानी आ गई अब मेरे optional subjects - हिन्दी साहित्य का 20th को और maths का 25th को exam था.और ऑफिस से ज़्यादा छुट्टियाँ नहीं मिल सकती थीं. खैर..फिर किसी तरह मैंने आख़िर 19 से 26 तक की छुट्टियों का इंतजाम कर लिया।
१९थ को जब मैं फिर शंकर आश्रम पहुँची तो हेमा बीमार होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी.उसका एक optional subject-history और दीपा का शिक्षा-शास्त्र का पेपर हो चुका था.अब रेस्तौरेंट का मिर्च वाला खाना खाकर ऊबे दीपा और हेमा ने आश्रम के स्वामी जी से आश्रम का सात्विक खाना देने के लिए निवेदन किया.वह खाना बहुत tasty था।
अगले दिन हमारा मतलब मेरा और हेमा का optional subject- हिन्दी का पेपर था.सुबह ९ से १२ बजे तक हिन्दी फर्स्ट का और २ से ५ बजे तक हिन्दी 2nd पेपर का.फिर वही बात- हिन्दी तो अपनी हिन्दी है। भले ही तैयारी कम थी पर कुछ न कुछ तो लिख कर ही आ गए.पेपर ख़त्म होते ही हम तीनो हर ki पौडी गए घूमने के लिए ........
वहां गंगा मैया के दर्शन - शीतल पानी,.......... हमने वहां एक कैमरामैन से कुछ photos भी खींचवाई। हम लोग शाम तक बहुत थक चुके थे रात को traffic jaam से बेहाल होकर जब हम आश्रम को लौट रहे थे तो ९ बज chuke थे हमने सोचा आज हमें आश्रम में खाना नही मिल पायेगा। लेकिन हमारे आने पर स्वामी जी ने कहा-" बेटा, क्या हुआ? देर कैसे?" जब हमने बताया कि traffic जाम था तो उन्होंने कहा कि हां परसों सोमवती अमावस्या है। जिसमे गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। इसलिए देश के कई भागों से कई लोग हरिद्वार में आयेंगे। हमारे लिए tasty खाना तैयार था। हमने खाया और रूम पर जाकर सो गए।
अगले दिन हेमा तो वापस अपने घर चली गई क्योंकि उसके सभी exams हो चुके थे.उसे स्टेशन छोड़ने के लिए आश्रम के ही एक भइया बस स्टेशन गए- स्वामीजी की अनुमति से।
अब मेरे और दीपा के पास maths की तैयारी के लिए २१ से 25th तक का टाइम था। हमारी तैयारी की पोल तो तब khuli जब 25th को हम पेपर देकर रूम से बाहर nikle, जिस statics और dynamics को छोड़ा, दोनों maths के papers में उसी statics और fluid dynamics के questions पेपर में भरे पड़े थे। ख़ुद पर हँसी आ रही थी कि maths की सारी akad निकल गई.कभी हम भी maths में पूरा question पेपर solve करके आते थे और एक भी chhoota तो दुःख होता था ..... और आज कितना कम करके भी दुःख नही हो रहा।
खैर पेपर करने के बाद फिर हम हर की पौडी पहुँच गए घूमने के लिए. last दिन था तो मैंने तो mummy के लिए choodiyan ली।
वहां के पुल और baazaron में ghoomte ghoomte रात हो गई। फिर हमें आश्रम आते आते ९ बज चुके थे.स्वामी जी ने आज भी कोई gussa नहीं किया और कहा कि तुमने अच्छा किया कि जाने से पहले गंगा मैया के दर्शन करने के लिए चले गए. हमने खाना खाया और सो गए। अगले दिन हमें वापस lautna था।
अगले दिन हमें वही वाले भइया स्टेशन छोड़ने आए. स्वामी जी ने हमें ऑटो तक छोड़ा......हाँ, उससे पहले स्वामी जी ने हमें दिखाया कि मेरी और दीपा की फोटो वहां के newspaper- amar उजाला में आई थीं.नीचे से लिखा था- pcs exam का पेपर देकर बाहर nikalkar अपनी खुशी का izhaar करती chhatraein.........और हमारी hansti हुई फोटो थी। akhbaar वालों को क्या पता कि ....इस हँसी के पीछे कितना दुःख छुपा था।
खैर फर्स्ट experience था pcs exams का...........जो exams के बोझ और friends get together की खुशी से भरा था.
रात को पास के एक रेस्तरां में हमने खाना खाया। और हरिद्वार की तपती गर्मी में फर्स्ट floor के गरमी से तपते कमरे में कूलर चला कर सो गए.अगले दिन हमारा सामान्य हिन्दी और essay का पेपर था.हिन्दी में हममे से किसी ने भी पहले से कुछ नहीं पढ़ा था। exams की सुबह ही 'सरकारी और अर्ध-सरकारी पत्र लेखन aur circulars. के बारे में पढ़ा। बस हिन्दी तो अपनी हिन्दी ही है.हिन्दी का पेपर ठीक ही कर लिया, वैसे भी इसके marks merit में काउंट नही होने थे, इसे बस पास ही करना था.फिर निबंध के पेपर में ३ घंटों में ३ निबंध लिखने थे, मैंने पहला लिखा- दहेज़ प्रथा पर, दूसरा लिखा-'वैज्ञानिक विकास और पर्यावरण प्रदूषण' पर, तीसरा लिखा-भारत में बाढ़ की समस्या पर। हर निबंध 700 शब्दों का लिखना था।
शाम को कमरे पर आकर हमने फिर पेपर discuss किया, हेमा, जिसकी साहित्यिक भाषा पर काफी अच्छी पकड़ है, ने अपनी भाषा में अच्छा काम किया था, जैसा कि उसके बताने से लग रहा था।फिर हम खाना खाने गए पर खाने में बहुत मिर्च थी.हेमा ने कहा "अब इस खाने ने मेरे मुह का taste ख़राब कर दिया, चलो टिक्की खाते हैं।उसने और दीपा ने टिक्की खायी और मैंने गोलगप्पे ...ये सोचते हुए कि गोलगप्पों का पानी खाना पचाने में मदद करेगा।
अगले दिन बस में बैठकर मैं हल्द्वानी आ गई अब मेरे optional subjects - हिन्दी साहित्य का 20th को और maths का 25th को exam था.और ऑफिस से ज़्यादा छुट्टियाँ नहीं मिल सकती थीं. खैर..फिर किसी तरह मैंने आख़िर 19 से 26 तक की छुट्टियों का इंतजाम कर लिया।
१९थ को जब मैं फिर शंकर आश्रम पहुँची तो हेमा बीमार होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी.उसका एक optional subject-history और दीपा का शिक्षा-शास्त्र का पेपर हो चुका था.अब रेस्तौरेंट का मिर्च वाला खाना खाकर ऊबे दीपा और हेमा ने आश्रम के स्वामी जी से आश्रम का सात्विक खाना देने के लिए निवेदन किया.वह खाना बहुत tasty था।
अगले दिन हमारा मतलब मेरा और हेमा का optional subject- हिन्दी का पेपर था.सुबह ९ से १२ बजे तक हिन्दी फर्स्ट का और २ से ५ बजे तक हिन्दी 2nd पेपर का.फिर वही बात- हिन्दी तो अपनी हिन्दी है। भले ही तैयारी कम थी पर कुछ न कुछ तो लिख कर ही आ गए.पेपर ख़त्म होते ही हम तीनो हर ki पौडी गए घूमने के लिए ........
वहां गंगा मैया के दर्शन - शीतल पानी,.......... हमने वहां एक कैमरामैन से कुछ photos भी खींचवाई। हम लोग शाम तक बहुत थक चुके थे रात को traffic jaam से बेहाल होकर जब हम आश्रम को लौट रहे थे तो ९ बज chuke थे हमने सोचा आज हमें आश्रम में खाना नही मिल पायेगा। लेकिन हमारे आने पर स्वामी जी ने कहा-" बेटा, क्या हुआ? देर कैसे?" जब हमने बताया कि traffic जाम था तो उन्होंने कहा कि हां परसों सोमवती अमावस्या है। जिसमे गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। इसलिए देश के कई भागों से कई लोग हरिद्वार में आयेंगे। हमारे लिए tasty खाना तैयार था। हमने खाया और रूम पर जाकर सो गए।
अगले दिन हेमा तो वापस अपने घर चली गई क्योंकि उसके सभी exams हो चुके थे.उसे स्टेशन छोड़ने के लिए आश्रम के ही एक भइया बस स्टेशन गए- स्वामीजी की अनुमति से।
अब मेरे और दीपा के पास maths की तैयारी के लिए २१ से 25th तक का टाइम था। हमारी तैयारी की पोल तो तब khuli जब 25th को हम पेपर देकर रूम से बाहर nikle, जिस statics और dynamics को छोड़ा, दोनों maths के papers में उसी statics और fluid dynamics के questions पेपर में भरे पड़े थे। ख़ुद पर हँसी आ रही थी कि maths की सारी akad निकल गई.कभी हम भी maths में पूरा question पेपर solve करके आते थे और एक भी chhoota तो दुःख होता था ..... और आज कितना कम करके भी दुःख नही हो रहा।
खैर पेपर करने के बाद फिर हम हर की पौडी पहुँच गए घूमने के लिए. last दिन था तो मैंने तो mummy के लिए choodiyan ली।
वहां के पुल और baazaron में ghoomte ghoomte रात हो गई। फिर हमें आश्रम आते आते ९ बज चुके थे.स्वामी जी ने आज भी कोई gussa नहीं किया और कहा कि तुमने अच्छा किया कि जाने से पहले गंगा मैया के दर्शन करने के लिए चले गए. हमने खाना खाया और सो गए। अगले दिन हमें वापस lautna था।
अगले दिन हमें वही वाले भइया स्टेशन छोड़ने आए. स्वामी जी ने हमें ऑटो तक छोड़ा......हाँ, उससे पहले स्वामी जी ने हमें दिखाया कि मेरी और दीपा की फोटो वहां के newspaper- amar उजाला में आई थीं.नीचे से लिखा था- pcs exam का पेपर देकर बाहर nikalkar अपनी खुशी का izhaar करती chhatraein.........और हमारी hansti हुई फोटो थी। akhbaar वालों को क्या पता कि ....इस हँसी के पीछे कितना दुःख छुपा था।
खैर फर्स्ट experience था pcs exams का...........जो exams के बोझ और friends get together की खुशी से भरा था.
Comments
clearing pcs exams in itsels is a great achievement...
smiles :)
WT U HAV WRITTEN ABOT URSELF REFLECTS IN UR BLOG,AND AFETR READING UR BLOG IT IN SUCH PRECISE DETAIL THAT I THINK AS IF I HAV GIVEN THE EXAM AND NOT U.....
ALL MY BEST WISHES EVN KNOWING THAT UR PAPERS WERE NOT GOOD ONE
STILL....ALL THE BEST
one can imagine ur simple and innocent behaiviour from your writing.As a beginner i feel u have done a nice piece of work my dear friend.
i enjoyed those lines when u have described different opinions about psiphon...really ur this article made me laugh.. very nice well written.
keep on writing :)
yaar ur words are just like MIRROR....... reflects back each and every moment exactly same as we spent in HARIDWAR.
In scientific words- Image is REAL,STRIGHT & its size is same to the original.
Or hum next time achi prep karege & also don't loose hope this time....
yaar ab mera v mann kar raha hai anubhavo ko likhne ka coz kuch anubhav muje akele v hue jab tu nahi thi.......
deepa i understood...........kaun se anubhav hue tujhe.