दिल सच्चा और चेहरा झूठा.
मानव मन को जान पाना बड़ा कठिन है.आज कल लोग दिखते कुछ और हैं,कहते कुछ और ,करते कुछ और। वैसे आज कल क्या ये हमेशा से ही होता रहा है आजकल कुछ नही बदला। लोग रहस्यमय होते हैं..आप जान नहीं सकते की उनके मन में क्या है......यही तो दुनिया बनाने वाले की खूबी है ....अगर सब कुछदेखकर ही पता लग जाता तो इंसान जिज्ञासु कैसे होता? हमने काफी प्रगति कर ली है विज्ञान में.......डॉक्टर आदमी की चीर-फाड़ करता है और बता देता है की उसे क्या बीमारी है.....लेकिन कभी कोई डॉक्टर या वैज्ञानिक ये नही बता पाया और न कभी बता सकेगा कि सामने खड़ा आदमी क्या सोच रहा है.....उसके मन में अभी क्या चल रहा है........ये तो सिर्फ़ साधू-संत या योगी ही बता पाते हैं....इसीलिए मुझे फिर से पाश्चात्य संस्कृति अपनी संस्कृति के आगे बौनी नज़र आती है.......उस बाहरी विज्ञानं से हम बाहरी ज्ञान तो पा सकते हैं पर वो आतंरिक ज्ञान नहीं जिसको ढूँढने की तड़प कुछ छुपी सी हम सभी के मन में है.........अगर न होती तो दुनिया के सारे ज्योतिषी इतने व्यस्त न होते...... कुछ लोग कहते हैं कि इंसान कि आँखे उसके दिल का हाल बता देती हैं.....हाँ ये बात कुछ सीमा तक सच...