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Showing posts from May, 2009

दिल सच्चा और चेहरा झूठा.

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मानव मन को जान पाना बड़ा कठिन है.आज कल लोग दिखते कुछ और हैं,कहते कुछ और ,करते कुछ और। वैसे आज कल क्या ये हमेशा से ही होता रहा है आजकल कुछ नही बदला। लोग रहस्यमय होते हैं..आप जान नहीं सकते की उनके मन में क्या है......यही तो दुनिया बनाने वाले की खूबी है ....अगर सब कुछदेखकर ही पता लग जाता तो इंसान जिज्ञासु कैसे होता? हमने काफी प्रगति कर ली है विज्ञान में.......डॉक्टर आदमी की चीर-फाड़ करता है और बता देता है की उसे क्या बीमारी है.....लेकिन कभी कोई डॉक्टर या वैज्ञानिक ये नही बता पाया और न कभी बता सकेगा कि सामने खड़ा आदमी क्या सोच रहा है.....उसके मन में अभी क्या चल रहा है........ये तो सिर्फ़ साधू-संत या योगी ही बता पाते हैं....इसीलिए मुझे फिर से पाश्चात्य संस्कृति अपनी संस्कृति के आगे बौनी नज़र आती है.......उस बाहरी विज्ञानं से हम बाहरी ज्ञान तो पा सकते हैं पर वो आतंरिक ज्ञान नहीं जिसको ढूँढने की तड़प कुछ छुपी सी हम सभी के मन में है.........अगर न होती तो दुनिया के सारे ज्योतिषी इतने व्यस्त न होते...... कुछ लोग कहते हैं कि इंसान कि आँखे उसके दिल का हाल बता देती हैं.....हाँ ये बात कुछ सीमा तक सच...

हिम्मत न हारिये

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हाँ जी ......नमस्ते फिर से मैं आपके सामने हूँ। पर आज कोई खास बात नही है। बस ऐसे ही सोचा कि कुछ पीछे की और कुछ आगे आने वाली बातों के बारे में सोच लेती हूँ। वैसे सोचते तो सभी लोग हैं......पर जो उस सोच पर अमल भी करता है........वही कुछ कर पाता है। ज़िन्दगी बड़ी लम्बी है....और सोचा जाए तो बहुत छोटी भी ........कुछ कर दिखने वाले छोटी उम्र में ही बहुत कुछ कर लेते हैं ..... कई बार सोचती हूँ....की सानिया मिर्जा, महेंद सिंह धोनी, अभिनव बिंद्रा, जैसे लोग भी हमारी ही उम्र के ही लोग हैं जिन पर आज अपना देश गर्व करता है.........कई लोग काफ़ी संघर्ष करते हैं कुछ पाने के लिए पर अंततः उनको सफलता मिल ही जाती है। सफलता पाने के लिए मैं सोचती हूँ कि दो मुख्य बातें होती हैं.एक होती है एकाग्रता और दूसरी चीज़ है संयम जिसे हम सेल्फ-कंट्रोल भी कह सकते हैं। इन दो बातों के अलावा दो और मुख्य बातें होती हैं वे हैं अपनी लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत या लगन , और दूसरी बात भाग्य। भाग्य पर हमारा कोई अधिकार नहीं हैं.......हमें नही मालूम कि हमारे भाग्य में क्या लिखा है...... लेकिन मेहनत और संयम ( सेल्फ- कंट्रोल) तो हमारे ही हा...

My haridwar trip-May 2009

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Well....I wanted to write this blog in hindi but it's not so easy to write hindi blogs as the system is not always able to convert all our hindi words(spelt in english) perfectly into hindi fonts. So.....I want to share some of my precious moments which I spent in Haridwar with all of u.........actually haridwar is very beautiful place, specially because of the river ganga. I like all those places where we can view the wonders of the beautiful nature but I like haridwar because of two reasons first my 'Ganga maiya' and second u know......the religious reasons. I nearly always get a chance to go to haridwar because of my bapuji's satsang.I reserved tickets for haridwar train 15 days before the day of our journey which was 7th of May. There were many people (sasangi i.e. bapuji's disciples who attend satsang) from haldwani, taiji along with mausi from almora and of course mummy & me. Later i also booked a journey ticket for bhaiya. So.....at last the day came. At...