एक ऐसे गगन के तले.......
आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ एक ऐसे गगन के तले…। जहाँ गम भी न हो आंसू भी न हो बस प्यार ही प्यार पले एक ऐसे गगन के तले… सपनो के ऐसे जहाँ में, जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो हम जा के वहां खो जाएँ, शिकवा न कोई गिला हो…. कहीं बैर न हो, कोई गैर न हो सब मिल के ही चलते चलें जहाँ गम भी न हो आंसू भी न हो, बस प्यार ही प्यार पले… एक ऐसे गगन के तले…… हे भगवान्!! ऐसा समय कभी न कभी ज़रूर आये…. जब दुनियां में कहीं कोई चालाकी और बेईमानी न हो…। सभी लोग एक दूसरे की ख़ुशी को देखकर खुश हो जाया करें। जहाँ सब एक दूसरे का सम्मान करते हों। जहाँ कोई किसी का दिल न दुखाये…. जहाँ किसी को किसी से कोई जलन न हो… जहाँ प्रेम और दया की भावना सभी में हो.… जहाँ लोग कभी गुस्सा भी न करते हों हमेशा हर तरफ शान्ति और प्यार रहे…. आह!!!! कितना अच्छा और कितना सुखद वातावरण होगा न? सभी खुद में ही संतुष्ट होंगे। … किसी को कोई लालच नहीं होगा कोई बलवान, किसी कमज़ोर के अधिकार हड़पने की क...