बहाव
कभी कभी ये जीवन उस पत्ते की तरह लगता है जो बहता चला जा रहा है,.................नदी के बहाव के साथ साथ। उस नदी का बहाव जिस तरफ होगा, उधर ही वो पत्ता बहता चला जाएगा। चाहे लाख कहीं पर रुकने की कोशिश करे, पर उस तेज़ बहते पाने में उस पत्ते को कहीं रुकने के लिए पल भर भी नहीं मिलता। समय उस नदी की धार की तरह है और ये ज़िन्दगी उस पत्ते की तरह। नदी का बहाव ही पत्ते की मंजिल निर्धारित करता है लेकिन पत्ता कभी नदी के बहाव की दिशा को नहीं मोड़ सकता। ठीक उसी तरह हम भी बहते चले जा रहे हैं,..........................उम्र बढती जा रही है। आदमी चाहकर भी इस बढ़ती चली जा रही उम्र को रोक नहीं पाता, न सब कुछ वो पा पाता है जो कुछ वो चाहता है ज़िन्दगी में। सब कुछ पाने के लिए संघर्ष है, और संघर्ष के बाद भी मंजिल का पता नहीं कि कब ज़िन्दगी का बहाव कौन सा मोड़ ले ले,............. कभी बचपन को याद करती हूँ कित...