वरकला की यात्रा
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नमस्कार 🙏
काफी समय से 'हिंदी' में कोई पोस्ट नहीं लिखी थी, तो सोचा, अब लिखती हूँ.
मैंने अपने पिछले पोस्ट में केरल के 'karkidakam' महीने के बारे में जानकारी दी थी, जो कर्क राशि के नाम पर है और मॉनसून/ बारिश लेकर आता है। उससे अगला महीना chingam, जो कि सिंह राशि के नाम पर है, केरल वासियों का एक पसंदीदा महीना है क्योंकि यह अपने साथ "ओणम" त्योहार की धूमधाम लेकर आता है.
इस साल, 'ओणम' 5th सितंबर, शुक्रवार को था. मुस्लिम त्योहार मिलाद उन नबी भी उस दिन ही था. मेरे पति नीरज की 4th सितंबर, बृहस्पतिवार को भी ऑफिस की छुट्टी थी, ओणम की. तो हम लोगों ने प्लान किया कि इस वीकेंड हम लोग केरल के एक प्रमुख पर्यटन स्थल 'वरकला'चलते हैं.वरकला (Varkala) केरल का एक खूबसूरत समुद्रतटीय शहर है.
तो अपने-अपने offices में ओणम celebration attend करने के बाद (मेरे ऑफिस में ओणम celebration 2nd September को था. इसमें हमें पारंपरिक क्रीम साड़ी with golden बॉर्डर पहन कर ऑफिस जाना था और एक पारंपरिक नृत्य "Thiruvathira" परफॉर्म करना था..इसके अलावा कई गेम्स थे..celebration अच्छा रहा. और मैने 4th September की छुट्टी के लिए apply किया. मेरे पति के ऑफिस में 3rd September को ही celebration था. उन्हें भी Shirt के नीचे पारंपरिक क्रीम रंग की "मुंड"/ धोती पहन कर function attend करना था) हम लोग 3rd सितंबर शाम 5:30 बजे वरकला चलने के लिए तैयार थे एक टैक्सी/कैब से. हमने ड्राइवर से alternate route लेने के लिए कहा क्योंकि हमें बताया गया था कि इस ओणम वीकेंड पर main route पर काफी ज्यादा ट्रैफिक मिलेगा. ड्राइवर ने alternate route ही लिया पर फिर भी ट्रैफिक था..हम लोग ऑफिस से काफी थके हुए आए थे, इसलिए सफर को बहुत एंजॉय नहीं कर पाए.
हालांकि केरल में प्राकृतिक दृश्य बहुत सुन्दर हैं, पर यहाँ की रोड्स की स्थिति अच्छी नहीं हैं. रोड्स काफी narrow और गड्ढों वाली हैं इसके अलावा ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से ड्राइविंग में परेशानी होती है. यहाँ की roads को देखते हुए हमें हमेशा नागपुर/ महाराष्ट्र की चौड़ी और समतल रोड्स का नेटवर्क याद आ जाता है. खैर हम रात लगभग 11:45 बजे अपने होटल "elixir cliff beach resort" पहुंच गए और अपने रूम No.1003 में सामान रखकर सो गए.
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| Our room in hotel |
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| Our hotel |
वहाँ पहुंच कर हमने टिकट लिया और केबल कार से काफी ऊपर पहाड़ी पर बने हुए जटायु के sculpture को देखा. यह दुनिया की सबसे बड़ी पक्षी मूर्तियों में से एक है, जिसकी कुल लंबाई 200 फीट और चौड़ाई 150 फीट है। जटायु की यह विशाल मूर्ति रामायण की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें जटायु ने माता सीता को बचाने का प्रयास किया था। कहा जाता है कि जब रावण, माता सीता का अपहरण करके आकाश मार्ग से अपनी लंका की ओर ले जा रहा था, तब पक्षीराज जटायु ने देखा और माता सीता को बचाने के लिए रावण से अकेले ही युद्ध किया किंतु रावण से जीत न सका. माता सीता की खोज के दौरान श्री राम और लक्ष्मण ने जटायु को मरणासन्न अवस्था में गिरा हुआ देखा. मरणासन्न जटायु ने श्री राम को बताया कि रावण ने सीता का हरण किया है और वह उन्हें दक्षिण दिशा की ओर ले गया है, इसके साथ ही उनके प्राण निकल गए। जिसके बाद श्री राम ने स्वयं अपने हाथों से उनका अंतिम संस्कार किया।
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| Foot print of Lord Ram |
Sculpture के पास में भगवान श्री राम के पद चिन्ह भी एक बड़े पत्थर पर अंकित हैं. वहीँ भगवान श्री राम का मंदिर भी था. हम लोग वहीँ कुछ फोटो क्लिक करके केबल कार से वापस चले गए. ड्राइवर ने बताया कि वो हमें अब elephant पार्क ले जाएगा. Elephant park एक चिड़ियाघर की तरह था. इसमें हमने elephants, rabbits, कई तरह की बर्ड्स, reptiles, etc देखे और फिर वापस आ गए. हमने ड्राइवर से लंच के लिए किसी रेस्टोरेंट पर कैब रोकने को कहा. एक छोटे रेस्टोरेंट पर कैब रुकी जहां हमने एक-एक डोसा और ड्राइवर ने बिरियानी खाई और फिर सफर में आगे बढ़े.
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| Mangrove forest |
आगे हमें ड्राइवर Mangrove forest safari के लिए ले गया. यहाँ हमें बताया गया कि चूंकि guides ओणम की छुट्टी पर हैं, इसलिये kayaking पॉसिबल नहीं है सिर्फ बोटिंग की जा सकती है..तो हमने बोटिंग की. Mangrove forest मतलब ऐसे पेड़ और झाड़ियाँ, जो तटीय खारे या अर्ध-खारे पानी में पाई जाती हैं, जहाँ उच्च ज्वार/high tide के समय समुद्री जल आता है. हालाँकि काफी तेज धूप थी पर बोटिंग के दौरान हवा ठण्डी ही चल रही थी. हमारी बोट backwaters में कई mangrove झाइयों के बीच से गुज़र रही थी जहां छाया थी. करीब 1 घंटे बाद हम वापस आ गए.
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| Kappil beach |
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| Kappil beach |
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| Kappil beach |
Next स्पॉट था, Kappil beach. यह एक ऐसा स्थान था जहां रास्ते के एक तरफ backwaters/झील थी तो दूसरी तरफ समुद्रतट था. थोड़ी दूर जाने पर ये दोनों मिलकर एक हो रहे थे. अच्छा नजारा था लेकिन धूप में थोड़ा कम मज़ा ले पा रहे थे. अब शाम के 5 बज गए थे और हम होटल की तरफ वापस चले. रास्ते में ड्राइवर हमें प्रसिद्ध जनार्दन स्वामी मंदिर भी ले गया. यहाँ केरल की परम्परा के अनुसार पुरुषों को मन्दिर के अंदर अपनी Shirt उतार कर ही जाना होता है, इसलिए नीरज मंदिर के अंदर नहीं गए पर मैं दर्शन करने गई. यहाँ के मंदिर North India के मन्दिरों से काफी अलग तरह के होते हैं. मुझे मंदिर का वातावरण काफी शांत और सुरम्य लगा. इसके बाद हम लोग वापस अपने होटल में आ गए ये सोचते हुए कि 6 बजे hotel के पास वाले beach पर sunset देखना है.
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| Beach near our hotel |
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| Beach near our hotel |
होटल पहुंच कर, fresh होकर हम होटल के पास वाले beach की ओर चले गए. Sunset हो ही रहा था और आकाश में लालिमा छायी हुई थी, नीचे सागर के पानी की लहरें आ-जा रही थीं। इतना सुंदर view देखकर समझ नहीं आता कि इसे बस यूँ ही देखा जाय या फोटो ली जाये। नीरज घर पर वीडियो कॉल के द्वारा sea-beach का सुन्दर नजारा दिखाने लगे. थोड़ी देर में अंधेरा होने लगा और हम अपने रूम की ओर वापस चले. होटल के रेस्टोरेंट में नीरज ने कॉफी और मैंने ग्रीन टी पी. फिर होटल के आयुर्वेदिक चिकित्सा वाले रूम पर जाकर 'Shirodhara' के बारे में पता किया, हमें बताया गया कि अगले दिन सुबह हम ये चिकित्सा करवा सकते हैं.
शिरोधारा एक आयुर्वेदिक उपचार पद्धति है, जिसमें सिर पर तेल की लगातार धारा डाली जाती है. यह उपचार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को शांत करने, तनाव कम करने, नींद में सुधार करने और समग्र शारीरिक व भावनात्मक संतुलन लाने में मदद करता है. रूम पर आकर मैंने सोचा कि वापस एर्नाकुलम लौटकर फिर वही रूटीन शुरू हो जायेगा-ऑफिस से घर और घर से ऑफिस. क्यों ना shirodhara का एक सेशन लेकर देखा जाय, मुझे आए दिन migraine होता रहता है, शायद कुछ असर दिखे. तो रात को डिनर करके हम सो गए.
अगले दिन यानि 5th September ओणम था. Hotel में सभी लोग सुबह ही क्रीम रंग के परिधानों में सजे हुए थे. मैंने सुबह 8:30 बजे से 10 बजे तक शिरोधारा और foot massage का सेशन लिया जो काफ़ी relaxing था, मुझे लगा कि मुझे जब भी समय मिले, शिरोधारा का कोर्स करना चाहिए जो 7 या ज्यादा दिनों का होता है...खैर फिर हम ब्रेकफास्ट करके बाकी के टूरिस्ट स्पॉट्स देखने के लिए कैब से चले. सबसे पहले हम boating करके golden आइलैंड गए, जहां हमने नागराज का मंदिर देखा, फिर लाइट हाउस, जो उस दिन बंद था. इसके बाद हमने एक रेस्टोरेंट में लंच किया. चूंकि ओणम का दिन था, तो हमने 'ओणम सध्या' यानि केले के पत्ते पर केरल का पारंपरिक खाना खाया. फिर हम प्रसिद्ध 'पापनासम' बीच गए. ऐसा माना जाता है कि 'पापनासम' के पवित्र पानी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं पर मैं सिर्फ़ अपने पैरों को स्नान करा सकी.
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| Black beach |
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| Onam Saddhya |
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| Black beach |
इसके बाद हम "ब्लैक बीच" गए जहाँ नारियल के ऊंचे पेड़ों के आगे काले पत्थर थे और पत्थरों से आगे sea-beach था . दृश्य काफी सुंदर था. हमने कुछ फोटो क्लिक की. वहाँ से लौटकर पास ही स्थित fish aquarium, जो एक spiral बिल्डिंग में था भी गए और तरह तरह की मछलियां देखी. अब 3 बजे थे और हमारी वापसी की ट्रेन शाम 6:30 की थी. ड्राइवर हमें cliff ले गया और बताया कि समुद्रतट पर स्थित cliff पर बने लोकल मार्केट, जो 1 km तक लंबा है, आप लोग जा सकते हो..हम लोग कैब से उतर गये और मार्केट में गए. ये एक अच्छा टूरिस्ट attraction था. यहाँ colourful handicraft shops, cafes, restaurants, etc थे. काफी चलने के बाद एक रेस्टोरेंट में रुक कर हमने कुछ चाय नाश्ता किया और फिर वापस आ गए. हमारे ड्राइवर ने हमें 5 बजे railway station छोड़ा. हमारी एर्नाकुलम वापसी की ट्रेन 6:30 की थी.
Overall, Varkala का trip अच्छा रहा..हालांकि मौसम में Munnar हिल स्टेशन जैसी ठंडक होती तो और अच्छा लगता. पर हर जगह की अपनी limitations होती हैं.
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| Jatayu Earth Centre |





















Comments
Secondly , as all these trips become memories of your past . Looking back at these blogs , in a certain way , gives us a glimpse of how you have experienced your life . Especially when we live so far apart in a parallel world .
Best wishes for all your future trips .
Pranam