मन के प्रश्न, मन के विचार

कभी कभी कुछ प्रश्न मेरे मन में कौंधते हैं। न सिर्फ कौंधते हैं, बल्कि कचोट देते हैं मन के धरातल को। कभी कभी मैं सोचती हूँ कि मैं इतना क्यों सोचती हूँ, फिर सोचती हूँ कि शायद वो व्यक्ति, जिसकी परिस्थितियां एकदम परिवर्तित होती रहती हैं, कभी एकदम ऊपर तो कभी एकदम नीचे, उसे सोचना ही पड़ता है और सोचना भी चाहिए। मैं सोचती ही रहती हूँ- कई विषयों पर। सब दिन एक जैसे कभी नहीं होते। सब लोग भी एक जैसे नहीं होते। न सबकी परिस्थितियां एक जैसी होती हैं, और न एक ही व्यक्ति की जीवन भर में एक जैसी परिस्थितियां रहती हैं।

मैं ये समझने की कोशिश करती हूँ कि परिस्थितियां मनुष्य के स्वभाव का निर्माण करती हैं या मनुष्य का स्वभाव परिस्थियों को अपने अनुसार बना लेता है। दो अलग अलग परिस्थितियों में पैदा हुए और पल कर बड़े हुए इंसानों का अलग अलग स्वभाव होगा। लेकिन एक इंसान के जीवन में भी तो परिस्थितियां बदल जाती हैं। संभवतः जो जीत-हार दोनों का और मान-अपमान दोनों का स्वाद चखते हैं,  निरपेक्ष रूप से देखते हुए, वे लोग घमंड को अपने सर पे उतना सवार नही होने दे सकते जितना कि वो लोग जो जीवन भर जीतते ही चले आ रहे हैं। पर फिर भी कुछ लोगों में घमंड कूट कूट कर भरा होता है, हारते हुए भी ऐसे लोग घमंड के नशे में डूबे रहते हैं, जिनके लिए लोग कहते हैं कि, ज़िन्दगी झंड है फिर भी घमंड है। बाकी जो जीतता ही रहा है जिंदगी भर, उसके घमंड का तो क्या कहना।

ये घमंड ही होता है, अपनी मान्यताओं का, जो इंसान-इंसान के बीच कलह करवाता है। ये घमंड ही है, जो किसी दूसरे को अपने से हीन समझकर उसकी बेइज़्ज़ती करवाता है। इंसान चाहे बाकी कई चीजों पर अपने पर control कर के दिखा दे, लेकिन ये जीत का घमंड, ये control करना तो किसी के बस की बात ही नही है। जीत मतलब सिर्फ किसी प्रतियोगिता में जीत नहीं। जीत तो कहीं भी हो सकती है। कुछ लोग सुंदरता में दूसरों से जीत का अनुभव कर सकते हैं, कुछ लोग बुद्धि में दूसरे से जीत का अनुभव कर सकते हैं, कुछ लोग ज्ञान का घमंड करते हैं तो कुछ लोग अपनी शक्ति और पद का घमंड करते हैं। कुछ अपने अच्छे व्यक्तित्व का घमंड करते हैं, तो कुछ अपने बोलने की प्रतिभा, खास तौर से english बोलने की प्रतिभा का घमंड करते हैं। और दूसरों को अपने से तुच्छ समझकर उनका अपमान करते हैं। पता नही कि जानबूझ कर करते हैं या हो जाता है। क्योंकि कुछ लोग अपमान करते हुए भी ये दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं वे बहुत ही डाउन टू अर्थ हैं और उन्हें दूसरे के लिए हमदर्दी है।
इस संसार में कई तरह के लोग हैं जो अपने अलग अलग स्वभावों को लेकर चलते हैं। कुछ अपने असली स्वभावों को लेकर, और कुछ अपने बनावटी स्वभावों को लेकर।

मैं कभी सोचती हूँ कि धन्य हैं वो लोग जो सभी से मिलते हुए भी अपने अच्छे स्वभाव को बरकरार रख पाते हैं और संसार के परिचितों के स्वभावों के ताने बाने में उलझने के बजाए, उन सबकी बुरी आदतों से अप्रभावित रहते हुए, सभी के अच्छे गुणों को ही ग्रहण करते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। कभी कभी मुझे लगता है कि मुझमें ये गुण कैसे आएगा। मैं कितना दुखी हो जाती हूँ तरह तरह के लोगों से मिलकर। जहां मान होता है वहां खुशी होती हैं और जहां अपमान होता है वहां दुख होता है। कहीं कहीं मान देने वाले आपके जाते ही पीछे से आपकी मज़ाक बना रहे होते हैं। तो ऐसे खुशी भी दुख में ही बदल जाती है जब इस बात का आभास होता है। वहीं कुछ लोग आपके अच्छे समय में आपका सम्मान करते हैं और आपके बुरे समय में आपका अपमान। इन सब बातों को झेलना कितना बड़ा काम लगता है मुझे। शायद इसीलिए मुझे अपने घर की दुनिया बहुत पसंद है। 'I feel like a king at my home.'

मेरे घर की दुनिया निराली है। यहां राजा भी मैं हूँ और रानी भी मैं हूँ, राजकुमार भी मैं और राजकुमारी भी मैं। यहां कोई नहीं है जो मुझे दुखी कर सके। कितनी स्वतंत्रता है। इसीलिए मुझे शनिवार और रविवार जो कि छुट्टी के दिन हैं, बहुत अच्छे लगते हैं। ना कोई burden, न कोई लोग, न कोई अपेक्षाएं, और न कोई मुझे नीचा दिखाने वाले। यहां बस मैं ही मैं हूँ। इसीलिए घर मुझे सबसे अच्छी जगह लगती है दुनिया की। 'I love my home soooo....much'


Comments

madhu said…
Expressed your feelings very nicely...
This world is a school, where each n every moment twacha u a lesson... Analyse...
Be softer than butter where kindness is concerned n be harder than steel where principle is concerned

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