अरे वाह.........आज मैंने हिन्दी में भी ब्लॉग करना शुरू कर दिया, हाँ वैसे हिन्दी में ब्लॉग लिखना शुरू में कुछ मुश्किल ज़रूर लगा पर अब तो आसान ही लग रहा है। अरे भाई अपनी भाषा में लिखने की तो बात ही कुछ और है।
आज होली का दिन था ,..था क्या? है...मैं आज सुबह जल्दी से नहाकर पूजा करके होली में लोगों से मिलने गई......अब मन्दिर भी जाना है.मम्मी कई लोगों के घर होली मिलने के लिए गई है। पापा मिलकर आ चुके हैं.सुबह करीब साढ़े नौ बजे सभी आंटी जी हमारे घर आयी थीं, होली के गीत गाये गए।
हमारे देश के त्यौहार बड़े ही अच्छे है, हर त्यौहार की अपनी खूबी है पर होली तो मुख्यतः लोगो से मिलने जुलने के लिए ही प्रसिद्द है.कई आदमी इस त्यौहार के दिन को शराब पीने का दिन मान लेते हैं...वे तो बस समाज में माहौल ख़राब करने का ही काम करते हैं। मेरे अनुसार शराब पीने वाला आदमी दुर्बल मानसिकता वाला होता है.वह वास्तविकता से भागकर उन सपनो की दुनिया में खो जाना चाहता है जिस दुनिया से शराब की बुरी आदत उसे धीरे धीरे दूर ले जाती है। खैर अलग अलग लोग अलग अलग सोचें......
मैं तो बस इस समय ये सोच रही हूँ की जल्दी से मन्दिर जाऊँ फिर जल्दी से नहाकर सो जाऊं या कुछ भी नया karoon कल से फिर ऑफिस वाला रूटीन शुरू हो जाएगा...........बाहर आंटी लोगों की मिली जुली आवाजें आनी शुरू हो गयीं ....तो अब मैं भी चलती हूँ.......
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keep it up.. waiting for more to come..